मैं पिछले 18 महीने से ग्रीनपीस के साथ स्वंयसेवी के तौर पर जुड़ा हूं और इसी नाते मुझे महान की परिस्थितियों के बारे में बहुत हद तक पता था। मगर मैंने सोचा नहीं था कि कभी मुझे महान जाने का मौका मिलेगा और जैसे ही मुझे ग्रीनपीस के एक अभियान दल के साथ महान के जंगल में कैम्प करके रहने का मौका मिला खुद को रोक नहीं पाया। स्थानीय निवासी महान के जंगल में इस दौरान महुआ इकट्ठा करने का काम करते हैं, जिससे उनके सालभर का खाने-पीने और रहने का खर्च निकलता है। आनेवाले अगले दो हफ्ते तक, 23 लोगों का हमारा दल स्थानीय लोगों के साथ मिलकर महुआ इक्टठा करने के काम में उनकी मदद करेगा। फिलहाल अपनी इस यात्रा कुछ तस्वीरें मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूं। देखिए महान की तस्वीरें और प्रकृति की खूबसूरती का लुत्फ उठाइये।

Sunset from the windows of the train.

सिंगरौली की ओर जाती ट्रेन से खींची गई सूर्यास्त की तस्वीर।  

Arrival at Budher, Mahan Forest, children inquisitively stare from a distance.

महान जंगल के रास्ते में पड़ता बुधेर गांव। कौतुहल भरी निगाहों से हमें देखते बच्चे।

 

पड़ाव का पहला दिन। आनेवाले दिनों में होनेवाली गतिविधियों के बारे में जानकारी देते ग्रीनपीस के कैंपेनर अक्षय गुप्ता।  

गांववालों के साथ मिलकर जोर-शोर से नारे लगाते स्वंयसेवक।  

महान के इस खूबसूरत जंगल में अभी कुछ और दिन बीतेंगे

महान के इस खूबसूरत जंगल में अभी कुछ और खूबसूरत दिन बीतेंगे।

महुआ कैंप में पहला दिन और जंगल की ओर जाता हमारा दल।

महुआ कैंप में महुआ चुनने का काम शुरु।

आज हमने पूरा दिन इन छोटी-छोटी टोकरियों में महुआ इकट्ठा किया।  

जंगल के बीचों-बीच महुए का एक शानदार पेड़।

अपनी दिनभर की मेहनत को बड़े चाव के साथ हमें दिखाते स्थानीय युवक जवाहर लाल सिंह।

और ये देखिए हमने कितना महुआ इकट्ठा किया।

जितना ज्यादा महुआ उतनी बड़ी मुस्कान, रामसिंह की इस मुस्कुराहट को देखकर तो यही ज़ाहिर होता है।

तस्वीरें- शाश्वती शंकर और सिद्धांत। सिद्धांत ग्रीनपीस के साथ स्वयंसेवी के तौर पर जुड़े हैं और फिलहाल महान में महुआ इकट्ठा करने के इस अभियान में शामिल हैं। 

Disclaimer: इस आलेख में प्रकाशित विचार लेखक के हैं।