आनुवांशिक कबाड़ को रोकना

हमारी खेती द्वारा पैदा की गई फसलों को अतीत में कभी भी इस तरह के परीक्षण से नहीं गुजरना पड़ा। लेकिन विशेष रूप से जीई (जेनेटिकली इंजीनियर्ड) या जीएम (जनेटिकली मोडिफाइड) फसलों के लिए जांच या परीक्षण जरूरी हैं।

जीई फसलें डीएनए को पुनर्संयोजित करने वाली प्रौद्योगिकी (Recombinant DNA technology) के माध्यम से प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से तैयार किए गए पादप जीव हैं। आनुवांशिकी इंजीनियरिंग (जीई) की अनिश्चितता और अपरिवर्तनीयता ने इस प्रौद्योगिकी पर बहुत सारे सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे भी आगे, विभिन्न अध्ययनों ने यह पाया है कि जीई फसलें पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं और इससे मानव स्वास्थ्य को संकट की आशंका है। इन सबके परिणामस्वरूप, इस खतरनाक प्रौद्योगिकी को अमल में लाने की आवश्यकता पर दुनिया भर में विवाद खड़ा हो गया है।

भारत एवं अन्य बहुत सारे देशों में, पर्यावरण में छोड़े जा रहे जीई या जीएम पौधों-जंतुओं (organism) के विरूद्ध प्रचार के साथ ग्रीनपीस का कृषि पटल पर पदार्पण हुआ। जीई फसलें जिन चीजों का प्रतिनिधित्व करती हैं वे सब हमारी खेती के लिए वाहियात हैं। वे हमारी जैवविविधता के विनाश और हमारे भोजन एवं खेती पर निगमों के बढ़ते नियंत्रण को कायम रखती हैं।

अभियान कथा:

जीई विरुद्ध अभियान ने देश में जीई फसलों की जरूरत पर एक गंभीर बहस सुनिश्चित करने में योगदान दिया है। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि भारत किसी जीएम खाद्य फसल के व्यावसायीकरण को मंजूरी नहीं देता है।

यह अभियान हमारे देश में जीएम फसलों के प्रवेश के विरुद्ध एक साहसिक मोर्चा तैयार करने के लिए किसानों, उपभोक्ताओं, व्यापारियों, वैज्ञानिकों एवं अन्य नागरिक समाज संगठनों को एक साथ लाया है। इसके परिणामस्वरूप, व्यावसायिक उद्देश्य से आए पहले जीएम खाद्य फसल बीटी बैंगन पर अनिश्चितकालीन स्थगन प्राप्त हुआ। यद्यपि बीटी बैंगन को अभी रोक दिया गया है लेकिन आनुवांशिक रूपांतरण से तैयार की जा रही 56 अन्य फसलें मंजूरी के इंतजार में हैं। इन सबके बीच चावल नेतृत्व की भूमिका में है। यदि इसे रोका नहीं गया तो पूरा देश जीएम बीज कंपनियों के लिए एक बड़ी फीडि़ंग प्रयोगशाला (feeding experiment) हो जाएगा।

यह अभियान किसी जीएम फसल को देश में प्रवेश से रोकने के लिए मौजूदा नियामक व्यवस्था के छिद्रों को पाटने की कोशिश कर रहा है। हम सरकार से एक जैव-सुरक्षा व्यवस्था (या कानून) के साथ आगे बढ़ने लिए कह रहे हैं जो नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरणीय सुरक्षा एवं राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक ढांचे की प्राथमिकता को तय करेगा।

चूंकि आम नागरिक एक उपभोक्ता है और उसे जीएम मुक्त भोजन का अधिकार है, हम उपभोक्ताओं को इस बात के लिए जागरूक करते आ रहे हैं एवं देश के खाद्य (फूड) ब्रांडों के साथ लगे हुए हैं ताकि देश के भोजन उद्योग का जीएम मुक्त रहना सुनिश्चित हो सके। देश में पहली बार जीएम खाद्य एवं खाद्य कंपनियों के विरुद्ध एक उपभोक्ता अभियान इस विचार को लेकर आरंभ हुआ है।

सारांशतः, हमारी बुनियादी मांगें हैं:

1. पर्यावरण में किसी भी तरह के जीएम जीवों की रिहाई पर पूर्ण प्रतिबंध, चाहे वह व्यावसायिक कृषि के लिए हो या प्रयोग एवं अनुसंधान के लिए।

2. कृषि-पारिस्थितिक पद्धतियों को चिह्नित करने वाले पारिस्थितिक विकल्पों के वैज्ञानिक अनुसंधान पर पुनः ध्यान देना जो बदलते जलवायु के साथ खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती हों।

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