परमाणु ऊर्जा असुरक्षित है

ग्रीनपीस परमाणु शक्ति का विरोध करता है क्‍योंकि यह लोगों और पर्यावरण के लिए ऐसे जोखिम पैदा करती है जो किसी भी कीमत पर अस्वीकार्य हैं। परमाणु ऊर्जा की लागत करोड़ों में होती है, ये अरक्षणीय हैं और इसके बनने में दशकों लगते हैं। भारत को इन जोखिमों को समझना चाहिए और ऊर्जा के अक्षय स्रोतों पर अपने सुरक्षित ऊर्जा भविष्‍य का निर्माण करना चाहिए।

परमाणु ऊर्जा की सच्चाई

परमाणु ताकत को लेकर कई मिथक हैं। मसलन परमाणु ताकत ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करेगी, यह जलवायु परिवर्तन के लिए समाधान सुझाएगी, यह सस्ती है, यह भारत को ऊर्जा उत्‍पादन के एक नए युग में ले जाएगी और भारत की ऊर्जा की कमी को पूरा करेगी। ये सभी दावे झूठे हैं और इससे जुड़ा सबसे बड़ा मिथक कि परमाणु ऊर्जा सुरक्षित है, यह सबसे बड़ा झूठ है।

FukushimaDamage at Fukushima I Nuclear Power Plant In Fukushima Prefecture, Japan. The damage was caused by an offshore earthquake and subsequent tsunami that occurred on 11 March 2011.  © DigitalGlobe

परमाणु ऊर्जा बिजली उत्‍पादन का असाधारण रूप से महंगा और अस्‍वीकार्य रूप से जोखिम भरा तरीका है। सभी विद्युत संयंत्र मानव भूलों, प्राकृतिक आपदाओं और डिजायन की विफलता के खतरे के दायरे में आते हैं। परमाणु ऊर्जा के साथ दुर्घटनाओं का एक बहुत बड़ा जोखिम जुड़ा है। इसके प्रभाव भयानक लंबे समय तक रहते हैं।

दुर्घटना के खतरे के अलावा, हर परमाणु संयंत्र अपने साथ रेडियोधर्मी कचरा भी लाता है जो सैकड़ों और कभी कभी हज़ारों साल तक हानिकारक बना रह सकता है। आज भी इस कचरे के निस्तारण के लिए कोई उचित हल मौजूद नहीं है।

ऊर्जा और विद्युत सेवाएँ, लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए हैं। वे जीवन को खतरे में डालने या स्‍वास्‍थ्‍य से समझौता करने वाले उपकरण नहीं हैं। भारत में इस उद्योग से जुडी जानकारियों को पर्दे में रखने वाली गोपनीयता और नागरिकों के हितों की ओर से प्रशासन की उदासीनता के कारण परमाणु ऊर्जा के खतरे और बढ़ जाते हैं। ग्रीनपीस मौजूदा और प्रस्‍तावित परमाणु संयंत्रों की एक पूरी समीक्षा और अक्षय ऊर्जा पर ध्‍यान केन्द्रित करते हुए भारत की परमाणु महत्‍वाकांक्षाओं की समीक्षा की मांग करता है।

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