द ग्रीनपीस बैलून

Standard Page - जनवरी 9, 2013
‘द ग्रीनपीस बैलून’ एक बार में तीन लोगों को लेकर उड़ान भर सकता है। जिसमें पायलट के साथ एक कार्यकर्ता और एक फोटोग्राफर बैठ सकता है। जमीन पर गति देने के लिए इसे तीन अन्य लोगों की भी जरूरत पड़ती है।

शुरुआत

गुब्बारा केवल हल्की हवा (दस नाट्स तक) में उड़ाया जा सकता है। दुनिया के अनेक हिस्सों में इसका मतलब यह है कि इसे सूर्योदय के दो घंटे बाद तक एवं दो घंटे सूर्यास्त के पहले उड़ाया जा सकता है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि दिन में सूर्य वायुमंडल की गर्मी को बढा़ देता है और यह बढी़ हुई गर्मी गुब्बारे की उड़ान को खतरनाक बना देती है। सर्दी के महीनों में, जब सूर्य का तापमान कम प्रबल होता है, दिन में उड़ान भरने के लिए अपेक्षाकृत बेहतर समय है।

गुब्बारा सामान्य स्थिति (समुद्रतल से दो हजार मीटर ऊपर तक के कम तापमान) में अधिकतम दो घंटे तक हवा में रह सकता है।

गुब्बारे की उड़ान दो तरह की होती है – स्वतंत्र एवं नियंत्रित ।

स्वतंत्र उड़ान के दरम्यान, गुब्बारा एक बार उड़ने के बाद हवा की सामान्य दिशा में उड़ता रहता है।

चालक कम या ज्यादा तेज हवा की विभिन्न दिशाओं का लाभ लेते हुए गुब्बारे को थोड़ा-बहुत घुमा सकता है।

नियंत्रित उड़ान के लिए स्वतंत्र उड़ान की अपेक्षा हवा की रफ्तार का कम (लगभग 8 नॉट्स अधिकतम) होना जरूरी है, क्योंकि हवा के प्रतिरोध का सामना करते हुए गुब्बारे में भरी गर्म हवा बाहर निकल सकती है और वह तेजी से नीचे गिर सकता है।

इतिहास

यह ऐतिहासिक ग्रीनपीस गुब्बारा सन् 1983 में बर्लिन की दीवार, 1987 में अमरीका के नेवादा परमाणु परीक्षण केंद्र तथा 1998 में भारत में परमाणु परीक्षण विरोध के दौरान ताजमहल के ऊपर तक उड़ान भर चुका है।

कार्य

ग्रीनपीस भिन्न-भिन्न प्रकार के अभियानों के लिए गुब्बारे का उपयोग करता है। जैसे बैनर टांगना, पर्यावरणीय अपराधों की तस्वीर खींचना और वायु प्रदूषण को मापने में पैराशूट छलांग के लिए प्लेटफॉर्म के रूप में।

विशेषता

स्कूप सहित 1 लिफाफा कैमरन, स्फेयर 105 सदृश

1 नेसील कैमरन  एरिस्टोक्रेट (टोकरी)

1 कैमरन बर्नर एमके 4 सुपर (4 काराबाइनर्स सहित)

1 ब्लोवर

2 स्टैंडर्ड वर्थिंग्टन सिलिंडर्स

3 मास्टर वर्थिंग्टन सिलिंडर्स

1 रिमोर्क वेस्टफेलिया – (ट्रेलर)