मुंबई में बारिश की वजह से बाढ़ की स्थिति पैदा हो गयी है।  बिहार, असम सहित देश के छह राज्य पहले से ही बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं भारी बारिश होने की वजह से 12 राज्यों में भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ से निपटने के लिये कई सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएँ जुटी हुई हैं। लेकिन प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी बाढ़ के दौरान एहतियात बरतने की जरुरत है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने विभिन्न आपदाओं से बचने के लिये गाइडलाइन जारी किया है। भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति में आप भी इन सुरक्षा एहतियातों को अपना बाढ़ के खतरे को कम कर सकते हैं-

घर में बनाएं इमरजेंसी किट
अपने घर में एक इमरजेंसी किट बनायें। इसमें ऐसे खाद्य सामग्री रखें जो लंबे समय तक खराब न हो, कम से कम तीन दिन के लिये पीने का साफ पानी, बैटरी से चलने वाले रेडियो, टॉर्च और अतिरिक्त बैटरियों, पानीरोधी कंटेनर में माचिस और जरुरी दवाईयों को भी किट में शामिल करें।
एक किट ऐसा बनायें जिसे आसानी से आप हाथ में ले सकें। इसमें आप जरुरी दवाईयों और उसकी पर्चियां, जरुरी कागजात जैसे बैंक पासबुक, लाइसेंस, बीमा पॉलिसी और दूसरे प्रमाण पत्र रख सकें। किट में बिस्तर और जरुरी कपड़ों को भी शामिल कर सकते हैं।

child at play in the flood

बच्चे व महिलाएं पर सबसे अधिक ध्यान दें
बाढ़ या बारिश में फंसे होने पर बच्चों और महिलाओं का खास ख्याल रखने की जरुरत है। महिलाओं के लिये जरुरी सैनटरी पैड्स और दूसरे सामान को किट में जरुर रखें। बाढ़ जैसी आपदाओं को मनोवैज्ञानिक असर भी गहरा होता है। अवसाद की समस्या भी बढ़ जाती है। ऐसे में बच्चों के मन पर इसका असर ज्यादा गहरी होती है। इसलिए जरुरी है कि इमरजेंसी किट बनाते समय बच्चों के लिये किताबों, खेल, पहेलियों आदि अन्य गतिविधियों के सामान को भी विशेष जगह दी जाये। कागज और पेंसिल भी रखा जा सकता है। प्लास्टिक की जगह कागज के कप, प्लेट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

बिजली जरूरी है, लेकिन इस्तेमाल में सावधानी बरतें
अक्सर ऐसा देखा गया है कि बाढ़ या भारी बारिश की स्थिति में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में सारे बिजली उपकरणों को बंद कर देना उचित रहेगा। बिजली के खुले तार घर में नहीं होने चाहिए। वैक्यूम क्लिनर, गैस जैसे उपकरणों का भी इस्तेमाल करने से बचें। अगर घर की छत से पानी का रिसाव होता है तो पंखा और लाइट जलाना भी खतरनाक हो सकता है।

बाहर निकलने से बचें
बारिश और बाढ़ की स्थिति में बाहर निकलने से बचें। अगर कहीं रास्ते में फंस गए हों तो फिर सुरक्षित जगहों पर ठिकाना बनायें। कई बार देखा गया है कि सड़क पर रहना या पुल को पार करना खतरनाक साबित हुआ है। ऐसे में सुरक्षित जगह पर आश्रय लेना ही समझदारी है। अगर कहीं जा रहे हैं तो लकड़ी के डंडे का इस्तेमाल करें। पानी में नहाने से बचें। सड़कों पर भी बारिश के बाद गढ्ढे हो जाते हैं, ऐसे में बाढ़ या बारिश के पानी के संपर्क में आने से बचना ही एकमात्र उपाय है। बच्चों को बाहर निकलने न दें।
अगर अपनी कार में सफर कर रहे हैं और बारिश-पानी के बीच फंस गए हैं तो गाड़ी को रोककर उससे बाहर निकल जायें। कई बार देखा गया है कि कार में पानी की वजह से लॉक लगने या आग लगने की घटनाएँ हो जाती हैं।

Stay away from going out

सबके साथ मिलकर योजना बनायें
बाढ़ जैसी स्थिति में ज्यादातर घर के सदस्य घबराने लगते हैं। इसलिये जरुरी है कि ऐसी स्थिति में घर के सारे सदस्यों को एक जगह इकट्ठा करें और उनके साथ एक योजना बनायें। घर के सदस्यों से आपसी संपर्क कैसे करेेंगे, आपातस्थिति में क्या-क्या विकल्प आजमाया जा सकता है, एक ऐसी सुरक्षित जगह जहां सारे सदस्य आपातकालीन स्थिति में मिलेंगे का चुनाव, हरेक सदस्य की समस्याओं को सुनने जैसी चीजों की पहले से योजना बनाकर रखनी चाहिए।

जानकारी है जरुरी
किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिये जरुरी है कि आपके पास पूरी जानकारी हो।  रेडियो या ऐसे ही संचार माध्यमों से जुड़े रहने की कोशिश करें। कई बार अचानक बाढ़ आ सकती है, इसलिए जरुरी है कि आप आसपास की ऊँची जगहों के बारे में जानकारी रखेँ। अगर बाढ़ की चेतावनी दी जाती है या जगह खाली करने का निर्देश दिया जाता है तो उसपर तुरंत अमल करें।
आपदा के वक्त सरकार और गैर सरकारी संस्थाएँ कई जरुरी हेल्पलाइन नंबर जारी करते हैं। यह जरुरी है कि आपके पास संबंधित इलाके में आपदा राहत कार्य में लगे संस्थाओं और हेल्पलाइन का नंबर हो, जिससे इमरजेंसी के वक्त संपर्क किया जा सके।

अफवाहों से बचें
बाढ़ जैसी स्थितियों में अफवाहों को न फैलायें और न ही उसपर विश्वास करें। आधिकारिक जानकारियों पर ही ज्यादा भरोसा करें। ऐसा देखा जा रहा है कि व्हॉट्सएप और अन्य माध्यमों से कई बार अफवाहों फैलायी जाती हैं और फिर अफरातफरी के माहौल का असामाजिक तत्व फायदा उठाते हैं। इसलिए जरुरी है कि इन अफ़वाहों पर ध्यान न दें।

Avinash Kumar Chanchal is the Senior Communications Campaigner at Greenpeace India