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ताजा जानकारी

 

बिजली की चमक से चमका धरनई

Blog entry by nnautiya | जुलाई 24, 2014

धरनई एक ऐसा गांव जिसने 30 साल बाद बिजली की चमक देखी है। वैसे तो यह गांव सड़क और रेलवे लाइन से जुड़ा हुआ है मगर बिजली जैसी मूलभूत सुविधा आजतक इस गांव में नहीं पहुंची है। मगर अब बिजली की चमक से धरनईवासियों के चेहरे भी चमकने लगे है। अब...

जंगल गंवाओ नहीं, बचाओ!

Blog entry by श्रीदेवी पद्मनाभन | जून 5, 2014

धूल-धरसित कस्बे वैढ़न के शोर-शराबे से कुछ ही किलोमीटर दूर महान जंगल एक अलग किस्म की शांति में लिपटा हुआ लगा। यहां कानों में गाड़ियों का शोर नहीं सुनाई पड़ता, सुनाई पड़ती है तो चिड़ियों और झींगुरों की आवाज़ें जो कानों में मधुर स्वर पैदा...

नहीं झेल सकता तीसरी बार विस्थापनः आमीन खान

Blog entry by अविनाश कुमार चंचल | जून 3, 2014

आमीन खान उम्र के पांचवे दशक में पहुंच चुके हैं। 1960 में रिहन्द बांध से विस्थापित एक परिवार की अगली पीढ़ी के मुखिया। मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालने वाले आमीन खान अब हर रोज मजदूरी करने भी नहीं जा पा रहे हैं। वजह है उनके उपर मंडरा...

अपुन की आवाज़

Blog entry by आकाश तमांग | जून 2, 2014

मेरे प्यारे भाई लोग और बहन लोग, अपुन का नाम आकाश तमांग। मैं सोशल वर्क का स्टूडेंट हूं। मेरे संस्थान ने मुझे महान में महुआ कैंप में जाने का मौका दिया। हमारा संस्थान ग्रासरुट स्तर पर देश के युवाओं के साथ मिलकर काम करता है। जैसे ही...

महुए की महक से गुलजार महान जंगल

Blog entry by अविनाश कुमार चंचल | अप्रैल 28, 2014

सुबह के चार बज रहे हैं। महुआ का महीना है। जब जंगलों में रात-दिन महुआ बीनने (चुनने) वालों का मेला लगा रहता है। सिंगरौली के महान जंगल में भी आसपास के जंगलवासी अपने पूरे परिवार के साथ महुआ बीन रहे हैं। बच्चे, बूढ़े और जवान इस काम में...

मेरी जिंदगी का एक 'महान' दिन

Blog entry by सिद्धांत | अप्रैल 25, 2014

मैं पिछले 18 महीने से ग्रीनपीस के साथ स्वंयसेवी के तौर पर जुड़ा हूं और इसी नाते मुझे महान की परिस्थितियों के बारे में बहुत हद तक पता था। मगर मैंने सोचा नहीं था कि कभी मुझे महान जाने का मौका मिलेगा और जैसे ही मुझे ग्रीनपीस के एक अभियान...

फुकुशिमा त्रासदी से भारत को सीखने की ज़रूरत!

Blog entry by सीमा जावेद | मार्च 11, 2014

कठपुलती के ज़रिए फुकुशिमा हादसे में मारे गए एक परिवार की कहानी को दर्शाती एक किसान महिला। फोटो- नोरिको हयाशी / ग्रीनपीस हम फुकुशिमा के लोगों को वह वापस नहीं लौटा सकते जो उन्‍होंने त्रासदी में खोया है लेकिन हम उनके साथ खड़े होकर यह...

अपनी ही ज़मीन से दर-बदर: 2

Blog entry by अविनाश कुमार चंचल | मार्च 9, 2014

एस्सार समेत तमाम कंपनियों के खिलाफ बढ़ता जा रहा प्रतिरोध दरअसल पूरे इलाके में कई कोयला खदान प्रस्तावित हैं। इन कोयले के खदानों से करीब लाखों लोगों की आबादी विस्थापित होने को मजबूर हो जाएगी। अकेले महान जंगल में प्रस्तावित  महान कोल...

अपनी ही ज़मीन से दर-बदर: 1

Blog entry by अविनाश कुमार चंचल | मार्च 8, 2014

बैकग्राउंड में दीवार पर लिखा सरकारी नारा नज़र आ रहा है, मगर ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही है। नये साल के पहले हफ्ते में जब भोपाल में शिवराज सिंह चौहान के मंत्री और विधायक विधानसभा में शपथ ले रहे थे, राज्य से गरीबी दूर करने का एलान किया जा...

सरकार ने कभी कुछ दिया नहीं, जो था वो भी छीन लिया

Blog entry by अविनाश कुमार चंचल | फरवरी 13, 2014

अपने आधे अधूरे मकान में खड़े अपनी पत्नी के साथ रामप्रसाद वैगा। ‘पिचा के मर जाओगे रात में बुलडोजर चलवा देंगे। बच्चा सबके बचावे खातिर आवे पड़ी। नौकरी का वादा छोड़ दहिन तबो कोई झांके भी नहीं आवत है’। देश की ऊर्जा राजधानी सिंगरौली...

हमारे खाद्य पदार्थों के कारण, संकट में बाघों का जीवन

Blog entry by अविमुक्तेश भारद्वाज | जनवरी 31, 2014

इंडोनेशिया में पाम ऑयल के लिए वर्षावनों की अंधाधुंध कटाई के कारण सुमात्राई बाघ विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। तस्वीर- ©Paul Hilton / Greenpeace. कुछ साल पहले जब भारत के जंगलों में सिर्फ 1411 बाघ शेष रह गए थे, तब मीडिया में...

एस्सार ने ग्रीनपीस इंडिया पर मुकदमा किया

Blog entry by समित एच | जनवरी 29, 2014

एस्सार मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करते महान संघर्ष समिति और ग्रीनपीस इंडिया के कार्यकर्ता। तस्वीर-सुधांशु मल्होत्रा।  22 जनवरी को ग्रीनपीस इंडिया के 14 कार्यकर्ताओं ने मुंबई में एस्सार की महालक्ष्मी स्थित 180 फीट लंबी इमारत को 36x72...

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