जलवायु परिवर्तन को रोकना

ग्रीनपीस इंडिया जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए अभियान चला रहा है। यह अभियान भूमंडल के हानि रहित विकास में हमारी मदद करेगा। हमने एक ऐसी ऊर्जा क्रांति की शुरुआत की है जो साफ ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ कम कार्बन पैदा करेगा। जिससे हम वर्तमान और भावी पीढ़ी दोनों के लिए अपने पर्यावरण और प्रकृति को संरक्षित कर सकते हैं।

हम सभी जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन की समस्या कोई कोरी कल्पना नहीं बल्कि एक यथार्थ है। बहुत से लोग यह नहीं जानते कि इसका समाधान हमारे ही हाथों में है। अतः दुनिया के लिए आवश्यक है ––

Ø   एक ऊर्जा क्रांति जो जैव ईंधन, पवन ऊर्जा एवं सौर ऊर्जा जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों के हित में कोयले को तिलांजलि दे।

Ø  हमारे वनों का संरक्षण क्योंकि इनसे वायुमंडल की स्वच्छता बनी रहती है।

Ø जिम्मेदार आईटी कंपनियां जो समाधान की इच्छा रखती हों और पर्यावरण कानूनों की वकालत करती हों।

अभियान कथा:

इन पृष्ठों में आप जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों के विषय में और अधिक जान सकते हैं। आप हमारे विस्तृत नीति विवरण को पढ़ सकते हैं और समाधान का हिस्सा बन सकने योग्य राजनीतिज्ञों, व्यवसायियों एवं अन्य लोगों की खोज कर सकते हैं।

समस्या

समाधान

  • अक्षय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग
  • क्या सूचना एवं प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र नेतृत्व के लिए आगे आ सकता है?
  • जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए लड़ाई लड़ते लोग
  • राष्ट्रीय जलवायु न्याय

ताजा जानकारी

 

ग्रीनपीस इंडिया ‘सबका साथ, सबका स्थायी विकास’ का समर्थन करती है।

Feature Story | जून 11, 2014 at 11:00

खूफिया ब्यूरो (आई बी) द्वारा पीएमओ को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में ग्रीनपीस इंडिया पर लगाए गए आरोपों को चुनौती देते हुए ग्रीनपीस इंडिया ने कहा है कि, वह पर्यावरण के लिए काम करने वाली एक स्वतंत्र संस्था है जो दीर्घकालीन विकास और लोगों के अधिकारों के...

जंगल गंवाओ नहीं, बचाओ!

Blog entry by श्रीदेवी पद्मनाभन | जून 5, 2014

धूल-धरसित कस्बे वैढ़न के शोर-शराबे से कुछ ही किलोमीटर दूर महान जंगल एक अलग किस्म की शांति में लिपटा हुआ लगा। यहां कानों में गाड़ियों का शोर नहीं सुनाई पड़ता, सुनाई पड़ती है तो चिड़ियों और झींगुरों की आवाज़ें जो कानों में मधुर स्वर पैदा...

वन सत्याग्रही को तीन हफ्ते बाद मिली ज़मानत

Feature Story | जून 3, 2014 at 14:00

पिछले तीन हफ्ते से भी अधिक दिनों से जेल में बंद महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ता और वन सत्याग्रही बेचनलाल शाह को जबलपुर हाईकोर्ट ने ज़मानत दे दी है। गौरतलब है कि महान जंगल में पेड़ों की मार्किंग का शांतिपूर्ण विरोध करने वाले बेचनलाल शाह और महान...

अपुन की आवाज़

Blog entry by आकाश तमांग | जून 2, 2014

मेरे प्यारे भाई लोग और बहन लोग, अपुन का नाम आकाश तमांग। मैं सोशल वर्क का स्टूडेंट हूं। मेरे संस्थान ने मुझे महान में महुआ कैंप में जाने का मौका दिया। हमारा संस्थान ग्रासरुट स्तर पर देश के युवाओं के साथ मिलकर काम करता है। जैसे ही...

3 कार्यकर्ता रिहा, मगर चौथा कार्यकर्ता अभी भी हिरासत में

Feature Story | मई 12, 2014 at 15:00

जेल में 40 से ज्यादा घंटे गुजारने के बाद हमारे तीन साथी कार्यकर्ता रिहा कर दिए गए हैं मगर चौथे कार्यकर्ता और महान संघर्ष समिति के सदस्य बेचनलाल शाह अभी भी हिरासत में हैं और उन्हें ज़मानत नहीं मिली है।

मृत लोगों के हस्ताक्षर और सरकारी फर्जीवाड़े से मिली महान कोल ब्लॉक को मंजूरी!

Feature Story | मई 9, 2014 at 17:13

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के अंतर्गत आने वाला महान कोल ब्लॉक पिछले बहुत समय से सवालों के घेरे में है। महान कोल ब्लॉक को इस साल फरवरी में वन एवं पर्यावरण मंत्री वीरप्पा मोईली ने अंतिम चरण की मंजूरी दे दी थी। मगर सवाल यह है कि जिस ग्रामसभा की...

महान: मारपीट के बाद 4 वन सत्याग्रही गिरफ्तार!

Feature Story | मई 8, 2014 at 9:30

बुद्धवार रात आधी रात को सिंगरौली जिले के वैढ़न स्थित ग्रीनपीस के गेस्ट हाउस में पुलिस ने अचानक पहुंचकर चार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं में दो ग्रीनपीस और दो महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ता शामिल हैं। स्थानीय...

महान: ग्रामीणों ने पेड़ों पर मार्किंग के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध किया

Feature Story | मई 7, 2014 at 14:09

ग्रामीणों के पुरज़ोर विरोध के बावजूद मध्य प्रदेश स्थित महान जंगल में एस्सार कंपनी का दखल दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। एस्सार ने महान जंगल क्षेत्र के ग्रामीणों के अधिकारों का एक बार फिर उल्लंघन किया। कंपनी ने सीमांकन के लिए जंगल में पेड़ों और...

महुए की महक से गुलजार महान जंगल

Blog entry by अविनाश कुमार चंचल | अप्रैल 28, 2014

सुबह के चार बज रहे हैं। महुआ का महीना है। जब जंगलों में रात-दिन महुआ बीनने (चुनने) वालों का मेला लगा रहता है। सिंगरौली के महान जंगल में भी आसपास के जंगलवासी अपने पूरे परिवार के साथ महुआ बीन रहे हैं। बच्चे, बूढ़े और जवान इस काम में...

मेरी जिंदगी का एक 'महान' दिन

Blog entry by सिद्धांत | अप्रैल 25, 2014

मैं पिछले 18 महीने से ग्रीनपीस के साथ स्वंयसेवी के तौर पर जुड़ा हूं और इसी नाते मुझे महान की परिस्थितियों के बारे में बहुत हद तक पता था। मगर मैंने सोचा नहीं था कि कभी मुझे महान जाने का मौका मिलेगा और जैसे ही मुझे ग्रीनपीस के एक अभियान...

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