वन विनाश का अंत

इंडोनेशिया के बरसाती जंगल आश्चर्यजनक रूप से ढेर सारी वानस्पतिक एवं जैविक प्रजातियों की शरणस्थली हैं, जिनमें से अधिकांश अब पृथ्वी पर कहीं और नहीं दिखते। ये स्वर्गनुमा जंगल बड़े बंदरों, सुमात्राई बाघ और 1 मीटर चौड़े दुनिया के सबसे बड़े फूल राफ्लेशिया के घर कहे जाते हैं। इनमें निवास कर रहे मानव समुदाय का वन से हजारों वर्षों से गहरा सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं भौतिक संबंध रहा है। इन संस्कृतियों की विविधता अद्वितीय है।

इंडोनेशिया क्षेत्रफल एवं जनसंख्या की दृष्टि से चीन एवं संयुक्त राज्य अमरीका की तुलना में छोटा होने के बावजूद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस उत्सर्जक देश है। निर्वनीकरण एवं तटीय दलदल भूमि (पीटलैंड) का नष्ट होना ग्रीनहाउस गैसों के लिए उत्तरदाई है क्योंकि इंडोनेशियाई दलदल के नष्ट होने के कारण ही भूमंडलीय स्तर पर चार प्रतिशत तक ग्रीनहाउस गैसों का अनुमान किया जाता है। लुग्दी एवं खनन उद्योग के साथ-साथ पाम ऑयल उद्योग वन विनाश एवं दलदल विनाश के प्रमुख कारणों में से एक है।

पाम ऑयल का उपयोग सस्ते खाद्य तेल के रूप में और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (चॉकलेट, आइसक्रीम, तैयार बेकरी उत्पादों इत्यादि), कॉस्मेटिक्स, साबुन एवं अन्य उत्पादों में किया जाता है। भारत इंडोनेशियाई पाम ऑयल के सबसे महत्वपूर्ण बाजार के रूप में उभर चुका है जबकि सन् 2009 में चीन दुनिया का सबसे बड़ा आयातक था। इस उत्पाद के भारतीय मांग से जंगलों एवं दलदल भूमि के क्षेत्रों में पाम ऑयल की खेती के विस्तार को प्रोत्साहन मिल रहा है।

‘शून्य निर्वनीकरण’ (जीरो डीफॉरेस्टेशन) के अंतर्गत ग्रीनपीस इंडोनेशिया में सभी तरह के वन-विनाश एवं दलदल भूमि के विनाश पर एक ‘विलंब काल’ या ‘स्थगन अवधि’ का आह्वान कर रहा है, और पाम ऑयल की खरीददार सभी कंपनियों से निर्वनीकरण एवं दलदल विनाश में शरीक आपूर्तिकर्ताओं के बारे में प्रश्न कर रहा है।

अभियान कथा

विश्व स्तर पर निर्वनीकरण एवं दलदल भूमि विनाश के मुद्दे पर जन-दबाव को देखते हुए यूनिलीवर, क्राफ्ट, मार्स एवं नेस्ले जैसी बड़ी कंपनियों के समूह ने संपोषणीय पाम ऑयल उत्पादन के लिए अपनी वचनबद्धता व्यक्त की है।

भारत में ग्रीनपीस पाम ऑयल के सभी आयातकों से यह सुनिश्चत करने को कह रहा है कि निर्वनीकरण या दलदल भूमि विनाश से इनके उत्पादों का संबंध नहीं है, और यह भी कह रहा है कि वे इंडोनेशिया में जंगलों के समापन पर ‘विलंब काल’ का समर्थन करें। भारतीय कंपनियों एवं भारतीय जनता के लिए यह आवश्यक है कि इंडोनेशियाई उत्पादक यह जान लें कि निर्वनीकरण या दलदल विनाश की कीमत पर उत्पादित पाम ऑयल में उनकी रुचि नहीं है। ‘विलंबकाल’ के दौरान, पाम ऑयल उद्योग जंगल क्षेत्र से इतर अपनी वर्तमान खेती को जारी रखने और वनमुक्त क्षेत्र में विस्तार के लिए स्वतंत्र है। लेकिन निर्वनीकरण एवं दलदल भूमि विनाश का रूकना अनिवार्य है।

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