ग्रीनपीस का इतिहास

Standard Page - फरवरी 1, 2012
1971 में एक शांतिपूर्ण एवं हरी-भरी दुनिया का सपना लिए कार्यकर्ताओं का एक छोटा सा दल, वैंकूवर, कनाडा से एक पुरानी फिशिंग बोट पर सैर को निकला। ग्रीनपीस के इन संस्थापक कार्यकर्ताओं का मानना था कि कुछेक मुट्ठीभर लोग भी अगर चाहें तो मिल कर कुछ महत्वपूर्ण और निर्णायक बदलाव ला सकते हैं।

वे अलास्का के पश्चिमी तट पर एक छोटे द्वीप एमचिटका में अमरीकी द्वारा किये जा रहे भूमिगत परमाणु परीक्षण के साक्ष्य जुटाने के मिशन पर निकले थे। यह इलाका दुनिया के सर्वाधिक भूकंप झेलने वाले क्षेत्रों में से एक है।

एमचिटका 3000 संकटग्रस्त समुद्री ऊदबिलावों, परविहीन गरुड़ों, परदेशी बाजों और अन्य जंगली जीव-जंतुओं की अंतिम शरणस्थली बना हुआ था। हालांकि उनकी पुरानी नौका, ‘फिलिस कॉरमैक’, एमचिटका पहुंचने से पहले ही रोक दी गई, किंतु इस यात्रा ने जनहित में दिलचस्पी रखने वाले दुनिया भर के हलकों में खलबली तो मचा ही दी।

इस खलबली के बावजूद अमेरिका ने चुपचाप परमाणु परीक्षण विस्फोट तो किया लेकिन इस विस्फोट के प्रभाव को लेकर उठे सवालों और आवाजों को नहीं दबा सका । एमचिटका में नाभिकीय परीक्षण उसी साल बंद हुआ, और उस द्वीप को बाद में पक्षियों का अभ्यारण्य घोषित किया गया।

आज, ग्रीनपीस एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी प्राथमिकताएं हैं वैश्विक पर्यावरणीय को लेकर जागरूकता और प्रचार अभियान।

इसका अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय एम्सटर्डम, नीदरलैंड में है, ग्रीनपीस के दुनिया भर में 50 लाख समर्थक हैं, और 42 देशों में इसके राष्ट्रीय और क्षेत्रीय कार्यालय हैं।