02 जून 2014 महुआ इकट्ठा करती एक ग्रामीण महिला

महान में महुआ इकट्ठा करने की तस्वीरें।

मेरे प्यारे भाई लोग और बहन लोग, अपुन का नाम आकाश तमांग। मैं सोशल वर्क का स्टूडेंट हूं। मेरे संस्थान ने मुझे महान में महुआ कैंप में जाने का मौका दिया। हमारा संस्थान ग्रासरुट स्तर पर देश के युवाओं के साथ मिलकर काम करता है।

जैसे ही मुझे पता चला कि मुझे ऐसी किसी कैंप में शामिल होने का मौका मिल रहा है, मैंने फटाफट हां कह दी। मुझे पता था ये कैंप एकदम जबरदस्त और झक्कास होगा। जब मैं यहां पहुंचा तो मैंने महसूस किया कि यहां कैंप के लोग वाकई बहुत मेहनती हैं और वह एकदम ज़मीनी स्तर पर स्थानीय ग्रामीणों के साथ काम कर रहे हैं। ये देख के मुझे बहुत खुशी मिली। मुझे लगा यहां की हकीकत तो दुनियाभर के लोगों को पता चलनी चाहिए कि किस तरह गांववाले अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। 

सच कहूं तो एक तरफ महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ता अपने जंगल और अपने अधिकारों के लिए पूरी तरह से गांवावालों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे हैं। तो दूसरी तरफ कंपनी वाले यहां आकर इन लोगों को इनकी ही ज़मीन से खदेड़ रहे हैं। मतलब यहां कंपनी की पूरी दादागिरी चल रही है। कंपनी अपनी कोयला खदान शुरु करने के लिए लोगों से जंगल छीन लेना चाहती है जो कि यहां के लोगों की रोज़ी-रोटी का ज़रिया है।

मगर इन लोगों को पता नहीं कि जंगल के बिना जिंदगी कैसे काटी जा सकती है? यहां गांववालों को जंगल से महुआ, तेंदू, पानी और भी बहुत सारी चीज़ें मिलती हैं ठीक वैसे ही जैसे मुंबई वालों को वड़ा पाव, चौपाटी की पाव भाजी और मरीन ड्राइव की हवा मिलती है। अब अगर कोई कंपनी आकर मुंबई वालों से ये सह छीन ले तो क्या लोग लड़ेंगे नहीं? बस इतनी सी बात है।

यहां पहुंचकर पता चला कि महुआ बीनने में हम महान संघर्ष समिति और स्थानीय लोगों की मदद करेंगे। जब मैंने गांववालों का हौसला और साहस देखा तो मुझे मुंबई के लोगों की याद आ गई। जैसे मुंबई वालों के अंदर हर परिस्थिति से लड़ने का हौसला और आत्मविश्वास है वैसे ही यहां के लोगों के पास भी है।

यहां आकर पता चला कि स्थानीय प्रशासन भी कंपनी के साथ मिला हुआ है। पिछले साल 6 मार्च 2013 को एक विशेष ग्रामसभा का आयोजन किया गया जिसमें खदान के पक्ष में कई लोगों के फर्जी हस्ताक्षर कर दिए गए। अब नई सरकार आई है देखते हैं वो क्या करती है? जबतक सरकारें कंपनियों का साथ देती रहेंगी तबतक ना सिर्फ महान जैसे जंगल बर्बाद होते रहेंगे बल्कि हजारों लोग तबाह होंगे और उनकी रोज़ी-रोटी छिनती रहेगी।

मैं अपने स्तर पर इस लड़ाई को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहता हूं ताकि अधिक से अधिक लोग इस लड़ाई के साथ जुड़ें। मेरी तरफ से महानवासियों को जादू की झप्पी जिंदाबाद!